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कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ ? कारण, लकà¥à¤·à¤£ और बचाव, जानें सब कà¥à¤› यहां
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कोई रोग है ही नहीं। यह मातà¥à¤° शारीरिक लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में परिवरà¥à¤¤à¤¨ है, जिसे सही उपचार से दूर किया जा सकता है।
कà¥à¤› लोगों को किसी खास गंध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ शरीर की संवेदनशील पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है, जो किसी विशिषà¥à¤Ÿ पदारà¥à¤¥ के अवशोषण (absorption) से बाहरी लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के रूप में पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ होती है। कई बार इसमें उलà¥à¤Ÿà¥€ होना, नजला, चकà¥à¤•र आना, शरीर का नीला पड़ जाना आदि जैसी असामानà¥à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होने लगती हैं। कोई à¤à¥€ खाने की चीजें किसी à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कर सकता है। यह उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ विशेष की शारीरिक संरचना पर निरà¥à¤à¤° करता है कि उसके उतà¥à¤¤à¤• किस पदारà¥à¤¥ से संवेदनशील हो उठते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि अंडा, दूध, फल, अनाज, मछली आदि से अधिक à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है, लेकिन यह बात शत-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ सही नहीं मानी जा सकती है। इसके अलावा à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के और à¤à¥€ कई सà¥à¤°à¥‹à¤¤ माने जाते हैं। फूलों के परागकण हवाओं में तैरते रहते हैं। इनके समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• में आकर कई बार लोगों को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है। अलग-अलग तरह की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं जैसे दमा, खांसी, लगातार छींकें आना और आंखों में लालपन से आप जूठसकते हैं। इसके साथ-साथ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने पर कई लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤•ट होते हैं जैसे खà¥à¤œà¤²à¥€ होना, शरीर पर दाने निकल आना आदि।
कà¥à¤¯à¤¾ है à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€
सà¥à¤•िनोलॉजी सà¥à¤•िन à¤à¤‚ड हेयर कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤•, दिलà¥à¤²à¥€ की डरà¥à¤®à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉ. निवेदिता दादू का कहना है कि वासà¥à¤¤à¤µ में, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कोई रोग है ही नहीं। यह मातà¥à¤° शारीरिक लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में परिवरà¥à¤¤à¤¨ है, जिसे सही उपचार से दूर किया जा सकता है। सà¥à¤—ंधित पदारà¥à¤¥, फूलों के पराग, धूलकण, पेटà¥à¤°à¥‹à¤² या केरोसिन तेल की गंध, फफूंदी, दरà¥à¤¦ निवारक गोलियां इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ इसी शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आते हैं। इन सारे कारकों को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¨ (पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¤¨) की संजà¥à¤žà¤¾ दी गयी है, जो शरीर में पà¥à¤°à¤µà¤¿à¤·à¥à¤Ÿ होने पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को अà¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ (Motivate) करते हैं। उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ à¤à¤‚टीबॉडी (Antibody)और पहले से शरीर में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¤‚टीबॉडी में परसà¥à¤ªà¤° à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होती है। इस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प शरीर में कà¥à¤› हानिकारक रसायन उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ होते हैं जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करते हैं। à¤à¤‚टीबॉडी जो मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कारक होते हैं, उसी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¤¨ (Antigen) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° होते हैं, जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करता है। ये रकà¥à¤¤ के गामा गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥à¤²à¤¿à¤¨ वाले अंश में मौजूद होते हैं। ये à¤à¤‚टीजेन और à¤à¤‚टीबॉडी जब परसà¥à¤ªà¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं, तो हिसà¥à¤Ÿà¤¾à¤®à¤¿à¤¨ और सेरोटोनिन नामक रसायनिक पदारà¥à¤¥ मà¥à¤•à¥à¤¤ करते हैं, जो शरीर ताप अनियंतà¥à¤°à¤£, शà¥à¤µà¤¾à¤¸ अनियंतà¥à¤°à¤£, तà¥à¤µà¤šà¤¾ शोध जैसी परेशानियां उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करते हैं।
कब होता है à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का असर
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ शरीर पर कà¤à¥€-कà¤à¥€ काफी तेजी से होता है, तो कà¤à¥€ काफी धीमी गति से होता है। यह शरीर की संवेदनशीलता पर निरà¥à¤à¤° करता है। कम संवेदनशील वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर कई दिनों तक à¤à¤• ही खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ के सेवन के उपरांत à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई पड़ते हैं, तो अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• संवेदनशील वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¤• या दो घंटे में ही सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से दिखाई देने लगता है।
कारण कà¥à¤¯à¤¾ है
चिकितà¥à¤¸à¤¾ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, ‘à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€â€™ वंशानà¥à¤—त à¤à¥€ हो सकती है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि किसी विशेष पदारà¥à¤¥ से संवेदनशील वंशागत रूप में चले। उदाहरणसà¥à¤µà¤°à¥‚प यदि मां को किसी विशेष गंध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो यह जरूरी नहीं कि उसकी संतानों को à¤à¥€ उसी से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अंडे से या किसी अनà¥à¤¯ चीज से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। आमतौर पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ किसी à¤à¤• चीज के कारण नहीं होती। इसके à¤à¤• से अधिक कारण हो सकते हैं। यदि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के दो कारण à¤à¤• साथ पà¥à¤°à¤•ट होते हैं तो इसके गंà¤à¥€à¤° परिणाम या लकà¥à¤·à¤£ सामने आते हैं इसलिठइसके निदान को जानना अति आवशà¥à¤¯à¤• है। इसके लिठसबसे पहले à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त इतिहास को जानना जरूरी होता है। इससे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के होने के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारणों का पता चल जाता है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£
नाक की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€- नाक में खà¥à¤œà¤²à¥€ होना, छीकें आना, नाक बहना, नाक बंद होना या बार-बार जà¥à¤•ाम होना आदि।
आंख की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€- आखों में लालिमा, पानी आना, जलन होना, खà¥à¤œà¤²à¥€ आदि।
शà¥à¤µà¤¸à¤¨ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€- इसमें खांसी, सांस लेने में तकलीफ à¤à¤µà¤‚ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ जैसी गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€- तà¥à¤µà¤šà¤¾ की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खà¥à¤œà¤²à¥€ होना, दाने निकलना, à¤à¤—à¥à¤œà¥€à¤®à¤¾, पितà¥à¤¤à¥€ उछलना आदि शामिल है।
पूरे शरीर की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€- कà¤à¥€-कà¤à¥€ कà¥à¤› लोगों में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¤à¤¿à¤¥à¤¿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाती है। सारे शरीर में à¤à¤• साथ गंà¤à¥€à¤° लकà¥à¤·à¤£ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाते हैं। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¤à¤¿à¤¥à¤¿ में तà¥à¤°à¤‚त हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² लेकर जाना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचाव
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचाव ही इसका सबसे बेहतरीन इलाज है, इसलिठà¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचने के लिठइन उपायों का पालन करें-
अगर आपको à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो सबसे पहले ये पता करें की आपको किन-किन चीजों से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है। इसके लिठआप धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से अपने खानपान और रहन-सहन को वॉच करें।
घर के आसपास गंदगी नहीं होने दें।
घर में अधिक से अधिक खà¥à¤²à¥€ और ताजा हवा आने दें।
जिस गंध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, उससे दूर रहें।
à¤à¤•दम गरà¥à¤® से ठंडे और ठडे से गरà¥à¤® वातावरण में न जाà¤à¤‚।
बाइक चलाते समय मà¥à¤‚ह और नाक पर रूमाल बांधें। आंखों पर धूप का अचà¥à¤›à¥€ कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ का चशà¥à¤®à¤¾ लगाà¤à¤‚।
गदà¥à¤¦à¥‡, रजाई, तकिये के कवर à¤à¤µà¤‚ चदà¥à¤¦à¤° आदि समय-समय पर गरà¥à¤® पानी से धोते रहें। रजाई, गदà¥à¤¦à¥‡, कंबल आदि को समय-समय पर धूप दिखाते रहें।
जिन पौधों के पराग कणों से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, उनसे दूर रहें।
घर में मकड़ी वगैरह के जाले न लगने दें। समय-समय पर साफ-सफाई करते रहें।
धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ से बचें। यदि धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¤°à¥‡ वातावरण में काम करना ही पड़ जाठतो फेस मासà¥à¤• पहन कर काम करें।
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